मांसपेशियों की मरम्मत के लिए ‘सुपर एचजीएफ’: क्यूशू विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने की एक नई खोज

बढ़ती उम्र के साथ कंकाल की मांसपेशियों (Skeletal Muscles) का कमजोर होना, ताकत में कमी, और चोट के बाद ठीक होने की क्षमता का घटना एक आम समस्या है। हालांकि, क्यूशू विश्वविद्यालय के कृषि संकाय के प्रोफेसर रयुइची तात्सुमी के नेतृत्व में शोधकर्ताओं की एक टीम ने एक ऐसे अणु की पहचान की है जो मांसपेशियों की मरम्मत से जुड़े महत्वपूर्ण संकेतों को सुरक्षित रखने और उन्हें और अधिक प्रभावी बनाने में मदद कर सकता है। यह अध्ययन 24 जुलाई 2026 को प्रसिद्ध जर्नल साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित हुआ है।

शरीर कैसे करता है मांसपेशियों की मरम्मत?

यह शोध हेपैटोसाइट ग्रोथ फैक्टर (HGF) नामक प्रोटीन पर केंद्रित है, जो कंकाल की मांसपेशियों की मरम्मत शुरू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सामान्य स्थितियों में, HGF मांसपेशियों के तंतुओं के आसपास के ऊतकों में निष्क्रिय रहता है।

जब मांसपेशी में चोट लगती है या खिंचाव आता है, तो HGF सक्रिय हो जाता है और ‘सैटेलाइट कोशिकाओं’ (मांसपेशियों की स्टेम कोशिकाएं) के c-met रिसेप्टर्स से जुड़ता है। यह संदेश कोशिकाओं को सक्रिय करता है, जिससे वे विभाजित होकर क्षतिग्रस्त मांसपेशियों का पुनर्निर्माण करती हैं।

उम्र बढ़ने के साथ आने वाली बाधाएं

उम्र बढ़ने के साथ HGF प्रोटीन में नाइट्रेशन (Nitration) नाम का एक रासायनिक बदलाव होता है, जिसमें इसके Y198 और Y250 स्थानों पर नाइट्रो समूह जुड़ जाता है। यह ठीक वही जगह है जहां से HGF रिसेप्टर से जुड़ता है। नाइट्रेशन के बाद, HGF अपने रिसेप्टर से ठीक से नहीं जुड़ पाता—शोधकर्ता इसकी तुलना एक जंग लगी चाबी से करते हैं जो ताले में फिट नहीं होती।

‘LASSS’ अणु का कमाल: बना ‘सुपर HGF’

शोधकर्ताओं ने सल्फर आधारित एंटीऑक्सिडेंट लाइपोइक एसिड ट्राइसल्फाइड (LASSS) का परीक्षण किया। प्रयोगों में पाया गया कि जब HGF को LASSS के साथ मिलाया गया, तो रिसेप्टर से जुड़ने की इसकी क्षमता दोगुनी से अधिक हो गई। साथ ही, यह नाइट्रेशन के कारण होने वाले नुकसान के प्रति भी अधिक प्रतिरोधी बन गया।

शोधकर्ताओं के अनुसार, LASSS केवल एक एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम नहीं करता, बल्कि यह HGF की संरचना में सूक्ष्म बदलाव करके उसे एक ‘सुपर HGF’ का रूप दे देता है।

चूहों पर सफल परीक्षण

शोध दल ने मांसपेशियों के शोष (Muscle Atrophy) से पीड़ित चूहों पर भी LASSS का परीक्षण किया। उपचारित चूहों में नाइट्रेशन का स्तर काफी कम देखा गया। यह परिणाम दर्शाते हैं कि LASSS के लाभ केवल प्रयोगशाला के परीक्षणों तक सीमित नहीं हैं।

भविष्य की संभावनाएं

यह खोज बढ़ती उम्र, लंबे समय तक बेड रेस्ट या शारीरिक निष्क्रियता के कारण मांसपेशियों में होने वाले नुकसान को रोकने के लिए नए रास्ते खोल सकती है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह तकनीक इंसानों के साथ-साथ पालतू जानवरों (जैसे कुत्ते और बिल्लियों) के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती है।

Credit Line: यह लेख क्यूशू विश्वविद्यालय (Kyushu University) द्वारा प्रदान की गई सामग्री और 
Scientific Reports में प्रकाशित शोध पत्र पर आधारित है।

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