प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फेसबुक पोस्ट पर कुछ समय के लिए लगी अस्थायी रोक के मामले में केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने मेटा के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब कर इस पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत स्पष्टीकरण देने को कहा है। मंत्रालय के अनुसार, यह बैठक अगले सात से दस दिनों के भीतर आयोजित की जा सकती है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि सरकार इस मामले को पूरी गंभीरता से देख रही है और मेटा से नीतिगत तथा तकनीकी दोनों स्तरों पर जवाब चाहती है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी चिंताओं को सीधे कंपनी के समक्ष रखेगा और यह जानना चाहता है कि किन परिस्थितियों में प्रधानमंत्री की पोस्ट पर अस्थायी रोक लगाई गई।
उन्होंने बताया कि मेटा ने इस घटना पर पहले ही खेद व्यक्त करते हुए प्रारंभिक स्पष्टीकरण दिया है, लेकिन सरकार ने इसे पर्याप्त नहीं माना है। केंद्र ने कंपनी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसमें यह स्पष्ट किया जाए कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए जा रहे हैं।
यह कार्रवाई उस दिन के बाद की गई है, जब केंद्र सरकार ने मेटा के एक वरिष्ठ अधिकारी को तलब किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जिस फेसबुक पोस्ट पर अस्थायी रोक लगी थी, उसमें देश के युवाओं को संबोधित करते हुए सरकार की ओर से पेपर लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकल्प को दोहराया गया था।
मेटा ने इस पूरे मामले को तकनीकी त्रुटि बताया और इसके लिए माफी भी मांगी है। हालांकि, सरकार का कहना है कि केवल तकनीकी खराबी का हवाला पर्याप्त नहीं है और पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच आवश्यक है।
गौरतलब है कि 23 जुलाई को साझा किए गए वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने छात्रों को आश्वस्त किया था कि सरकार नीट परीक्षा पेपर लीक मामले में दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई कर रही है और परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
एस. कृष्णन के अनुसार, मेटा ने सरकार को बताया है कि 28 जुलाई से कंपनी ने एक नया प्रोटोकॉल लागू किया है। इसके तहत प्रधानमंत्री और अन्य उच्च-प्रोफाइल खातों से प्रकाशित होने वाली सामग्री की अतिरिक्त निगरानी की जाएगी, ताकि भविष्य में किसी तकनीकी कारण से इस प्रकार की अनजानी रोक की संभावना को कम किया जा सके।
